कोरोना महामारी के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को देशभर में CBSE 12वीं बोर्ड के एग्जाम रद्द कर दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 12वीं का रिजल्ट तय समयसीमा के भीतर और तार्किक आधार पर तैयार किया जाएगा। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्टूडेंट्स का असेसमेंट किस आधार पर होगा।
CBSE सचिव अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि स्टूडेंट्स के मुल्यांकन के लिए स्ट्रक्चरिंग क्राइटेरिया पर काम चल रहा है, इसे पूरा करने में करीब 2 हफ्ते का समय लगेगा। फिर इस पर फैसला होगा।
पैरेंट्स, टीचर्स, प्रिंसिपल और स्टूडेंट्स को इसके लिए थोड़ा इंतजार करने की जरूरत है। घबराएं नहीं।
CBSE की 12वीं बोर्ड के रिजल्ट का फॉर्मूला इसी हफ्ते सामने आने की संभावना है। नतीजों के लिए CBSE का फोकस अभी इंटरनल असेसमेंट पर भी है। इसके अलावा अगर स्टूडेंट्स एग्जाम देना चाहते हैं, तो उन्हें ये विकल्प भी दिया जाएगा।
अभी इन पर विचार
♦ छात्रों के रिजल्ट का मूल्यांकन उनके पिछले 3 साल के परफॉर्मेंस के आधार पर होगा। यानी 9वीं, 10वीं और 11वीं के रिजल्ट को आधार बनाया जा सकता है।
♦ 10 वीं बोर्ड के रिजल्ट और 12वीं के इंटरनल असेसमेंट के आधार पर छात्रों का रिजल्ट तैयार हो सकता है।
♦ 11वीं और 12वीं के इंटरनल असेसमेंट के आधार पर रिजल्ट तैयार किया जा सकता है।
♦ 10वीं की तरह ही 12वीं के लिए भी ऑब्जेक्टिव क्राइटेरिया तैयार किया जाएगा। कोई स्टूडेंट इंटरनल असेसमेंट के बेस पर रिजल्ट से संतुष्ट नहीं है तो उसे एग्जाम देने का मौका दिया जाएगा। हालांकि, इसके लिए कोरोना बने हालात संभलने का इंतजार किया जाएगा।
इंटरनल एसेसमेंट के चांस ज्यादा
♦प्रधानमंत्री की मंगलवार को आयोजित बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ये बयान दिया था कि रिजल्ट के लिए इंटरनल एग्जाम को भी आधार बनाया जा सकता है। ऐसे में इस फॉर्मूला के चांस ज्यादा हैं। हालांकि, CBSE ने स्पष्ट कर दिया है कि अभी किसी तरह के कयास न लगाए जाएं।
10वीं के लिए भी है इंटरनल असेसमेंट
10वीं की परीक्षाएं पहले ही रद्द कर दी गई है। इसका रिजल्ट तैयार करने के लिए 5 सदस्यीय शिक्षकों की टीम का गठन हर स्कूल में किया गया है। ये टीम भी इंटरनल असेसमेंट के आधार पर 10वीं का रिजल्ट तैयार करेगी।
पिछले साल की तरह, अगर कुछ स्टूडेंट्स परीक्षा देना चाहते हैं, तो हालात सामान्य होने पर उन्हें सीबीएसई द्वारा ऐसा विकल्प दिया जाएगा। CBSE कक्षा 12वीं की परीक्षा के लिए इस साल करीब 14.5 लाख स्टू़डेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया था।
इससे पहले परीक्षा को लेकर 23 मई को हुई एक हाईलेवल मीटिंग के बाद सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दो दिन के अंदर सुझाव मांगे गए थे।
कोरोना के कारण स्थगित हुई 12वीं की परीक्षा को लेकर राज्यों ने अपने सुझाव केंद्र को भेज थे। परीक्षा पर सहमति जताने वाले 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 29 ने बैठक में प्रस्तावित बी-विकल्प पर अपनी सहमति जाहिर की थी। वहीं, राजस्थान, त्रिपुरा और तेलंगाना ने विकल्प- ए यानी मौजूदा फॉर्मेट में ही परीक्षा आयोजित करने पर सहमति जताई थी।
CBSE ने दिए थे 2 विकल्प
01. सिर्फ मेजर सब्जेक्ट की परीक्षा निर्धारित सेंटर्स पर कराई जा सकती है। इन परीक्षाओं के नंबर्स को आधार बनाकर माइनर सब्जेक्ट में भी नंबर दिए जा सकते हैं। इस विकल्प के तहत परीक्षा करवाने के लिए प्री-एग्जाम के लिए 1 महीना, एग्जाम और रिजल्ट डिक्लेयर करने के लिए 2 महीने और कंपार्टमेंट एग्जाम के लिए 45 दिनों का समय चाहिए होगा। यानी इस विकल्प को तब ही अपनाया जा सकता है, जब CBSE बोर्ड के पास 3 महीने की विंडो हो।
02. इस विकल्प में सभी सब्जेक्ट्स के एग्जाम के लिए डेढ़ घंटे (90 मिनट) का समय निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही पेपर में सिर्फ ऑब्जेक्टिव या शॉर्ट क्वेश्चन ही पूछने की सलाह दी है। इस तरह 45 दिन में ही एग्जाम कराए जा सकते हैं। इसमें कहा गया है कि 12वीं के बच्चों के मेजर सब्जेक्ट की परीक्षा उनके ही स्कूल में ले ली जाए। साथ ही, एग्जामिनेशन सेंटर्स की संख्या बढ़ाकर दोगुनी कर दी जाए।
ने रद्द किए एग्जाम: यह होगा


