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जानिए अपने अधिकार : पुलिस मनमानी नहीं कर सकती आपके साथ

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जानिए अपने अधिकार : पुलिस मनमानी नहीं कर सकती आपके साथ

 

वैसे तो पुलिस हमारी सुरक्षा के लिए होती है लेकिन कई बार देखा गया है कि पुलिस के ही कुछ पथभ्रष्ट कर्मचारी-अधिकारी लोगों को बेवजह परेशान करते हैं और खौफ की वजह बन जाते हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब पुलिस ने पर्याप्त कारण न होने के बावजूद भी अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए लोगों को अवैध तौर पर हिरासत में रखा या गिरफ्तार किया। अगर आपका सामना भी पुलिस के इस डरावने रूप से होता है तो घबराएं नहीं। पुलिस किसी को मनमर्जी से गिरफ्तार नहीं कर सकती। संविधान और कानून की ओर से नागरिकों को गिरफ्तारी के दौरान भी कई अधिकार दिए गए हैं। अत: पुलिस को पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनानी होती है। इसके बिना गिरफ्तारी गैरकानूनी मानी जाती है। अगर कानून तोड़ा तो खुद पुलिस पर भी कार्रवाई हो सकती है। बहरहाल, आप अपने अधिकार जानते हैं तो अन्याय करने वाला आपको छूने से पहले पहले चार बार सोचेगा। इसलिए यह जानना जरूरी है कि किन परिस्थितियों में आपको गिरफ्तार किया जा सकता है और गिरफ्तारी के दौरान व इसके बाद आपके क्या अधिकार हैं।

गिरफ्तारी का कारण बताना जरूरी

♦ पुलिस किसी को केवल शिकायत या शक के आधार पर ही गिरफ्तार नहीं कर सकती। गिरफ्तारी से पहले आपका अपराध और गिरफ्तारी का आधार बताना जरूरी है।

♦ किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी को वर्दी में होना चाहिए और उसकी नेम प्लेट पर नाम साफ.-साफ लिखा होना चाहिए।

♦ यदि कथित अपराध में सात वर्ष या इससे कम की अवधि के दंड का प्रावधान है तो आपको बगैर वारंट गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। हां, पुलिस आपको थाने में ‘हाजिर होनेÓ की सूचना जारी कर सकती है। आपको तभी गिरफ्तार किया जा सकता है जबकि आप समन जारी करने के बाद भी थाने में हाजिर नहीं होते।

♦ मौके पर गिरफ्तारी के लिए पुलिस को अरेस्ट मेमो तैयार करना होता है। इसमें गिरफ्तारी का टाइम, गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी, गिरफ्तार व्यक्ति और प्रत्यक्षदर्शी के हस्ताक्षर होंगे।

मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही लगेगी हथकड़ी

अगर आरोपी व्यक्ति गिरफ्तारी का विरोध नहीं कर रहा हो तो पुलिस उसके साथ दुव्र्यवहार नहीं कर सकती और ना ही मारपीट कर सकती है। गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी को आमतौर पर किसी भी व्यक्ति को हथकड़ी नहीं लगानी चाहिए। आपको तब तक हथकड़ी नहीं लगाई जाना चाहिए, जब तक कि भागने या भागने का प्रयास करने का स्पष्ट खतरा ना हो या आप इतने उग्र हैं कि आपकी हरकत पर नियंत्रण किए बगैर हिरासत में नहीं रखा जा सकता। गिरफ्तारी के समय हथकड़ी मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही लगाई जा सकती है। गिरफ्तारी के बाद व्यक्ति को तुरंत थाना प्रभारी अथवा मजिस्ट्रेट के पास लाया जाना चाहिए। पुलिस की डायरी में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का नाम दर्ज होना चाहिए।

गिरफ्तारी के दौरान यह हैं अधिकार

♦ यदि आपको जमानती अपराध के तहत गिरफ्तार किया गया है तो, यह बताया जाना चाहिए कि आपको जमानत पर छोड़ा जा सकता है।

♦ आप गिरफ्तारी की सूचना अपने मित्र या परिवार को दे सकते हैं। गिरफ्तार व्यक्ति को इस अधिकार के बारे में जानकारी नहीं है तो भी पुलिस को 12 घंटे के अंदर जानकारी उसके परिवार वालों को देनी होगी।

♦ गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी आपके पास से जब्त सभी वस्तुओं को सुरक्षित अभिरक्षा में रखेंगेे। आपको ऐसी सभी वस्तुओं की सूची दी जानी चाहिए।

♦ प्रत्येक गिरफ्तारी तथा उसके स्थान का ब्यौरा राज्य तथा जिला पुलिस नियंत्रण कक्ष को गिरफ्तारी के 12 घंटे के अंदर दिया जाना चाहिए। इस सूचना को कक्ष के नोटिस बोर्ड पर स्पष्ट रूप से प्रर्दिर्शत किया जाना चाहिए।

♦ गिरफ्तारी के 24 घंटे के अन्दर आपको निकटतम उचित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाए। इस अवधि में आपको गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक ले जाने का समय शामिल नहीं है।

♦ पुलिस को अगर किसी को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में रखना हो तो उसको मजिस्ट्रेट से इजाजत लेनी होगी। मजिस्ट्रेट इस संबंध में इजाजत देने का कारण भी बताएगा। नियम है कि प्रत्येक 48 घंटे में डॉक्टरों का पैनल गिरफ्तार व्यक्ति की मेडिकल जांच करे। प्रत्येक दस्तावेज या मेमो को मजिस्ट्रेट को रेकॉर्ड स्वरूप भेजा जाए। पुलिस रिमांड अधिकतम 15 दिन का ही हो सकता है।

कानूनी सलाह का अधिकार

गिरफ्तार के दौरान आपको अधिकार है कि आप अपनी पसन्द के वकील से सलाह ले सकें। पुलिस जांच के दौरान भी अपने वकील और परिजनों से परामर्श कर सकते हैं। आप स्वयं वकील नियुक्त करने में समर्थ नहीं है तो मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह अधिकार गिरफ्तारी के समय से ही शुरू हो जाता है। यदि आपको इस अधिकार की जानकारी नहीं है तो यह मजिस्ट्रेट का कत्र्तव्य है कि वह अदालत में पहली बार उपस्थित किए जाने के समय आपको इस अधिकार की जानकारी दें। यह पुलिस का कत्र्तव्य है कि वह निकटतम विधिक सहायता समिति को ऐसे व्यक्ति की सूचना दे, जिसे विधिक सहायता की जरूरत है।

मारपीट नहीं कर सकती पुलिस

♦ हिरासत में पूछताछ और जांच के दौरान आपके साथ दुव्र्यवहार या मारपीट नहीं की जा सकती। आप पंजीकृत चिकित्सक द्वारा अपने शरीर की मेडिकल जांच कराने की मांग कर सकते हैंं। चिकित्सा जांच के दौरान आपके शरीर पर पाए गए जख्मों को रिकार्ड रखा जाता है। इसका फायदा यह होता है कि अगर आपके शरीर पर कोई चोट नहीं है तो मेडिकल जांच में इसकी पुष्टि हो जाएगी। इसके बाद यदि पुलिस कस्टडी में रहने के दौरान आपके शरीर पर कोई चोट के निशान मिलते हैं तो यह पुलिस के खिलाफ मारपीट का पक्का सबूत होगा। अत: मेडिकल जांच के बाद फंसने के डर से पुलिस आमतौर पर मारपीट नहीं करती है।

♦ सर्वोच्च न्यायालय निर्देश है कि जब पुलिस गिरफ्तार व्यक्ति से पूछताछ कर रही हो तो संबंधित वर्दी में हो। नाम की पट्टी, पद स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। बयान की एक प्रति गिरफ्तार व्यक्ति को मिलना चाहिए। अगर हिरासत में कोई पुलिसकर्मी सताता है तो वह व्यक्ति उसकी पहचान कर आपराधिक आरोप दर्ज करा सकता है।

गिरफ्तार महिलाओं के विशेष अधिकार

♦ किसी भी महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज निकलने से पहले यानी रात में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। अगर किसी विशेष परिस्थिति में महिला को गिरफ्तार करना ही पड़ता है तो इसके लिए एरिया मजिस्ट्रेट से इजाजत लेनी होगी। गिरफ्तार स्त्री का कोई रिश्तेदार या मित्र उसके साथ थाने जा सकता है।

♦ महिला को सिर्फ महिला पुलिसकर्मी ही गिरफ्तार करेगी, पुरुष पुलिसकर्मी गिरफ्तार नहीं करेगा। महिलाओं की तलाशी सिर्फ किसी महिला अधिकारी द्वारा ही ली जानी चाहिए जिसमें शालीनता का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

♦ महिला को थाने में अलग लॉक-अप में रखा जाना चाहिए। उन्हें ऐसी जगह नहीं रखा जाना चाहिए जहां पुरुष संदिग्धों को रखा गया हो। महिला संदिग्धों से पूछताछ सिर्फ महिला पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में ही की जाएगी। उसे मानवीयता के साथ रखा जाए, जोर-जबरदस्ती करना गैरकानूनी है।

♦ महिला की डाक्टरी जांच केवल महिला डॉक्टर ही करे। अगर हिरासत में महिला के साथ दुष्कर्म या दुव्र्यवहार होता है तो उसे तुरंत डॉक्टर से जांच की मांग करनी चाहिए।

♦ जब किसी महिला की गैऱ-जमानती अपराध के लिए गिरफ़्तारी होती है तो अपराध के बेहद गंभीर होने के बावजूद, यहां तक कि अगर उसकी सजा मृत्युदंड भी हो, तो भी, न्यायालय उसे जमानत पर रिहा कर सकता है।

गिरफ्तारी पर बच्चों के अधिकार

♦ भारतीय दंड संहिता के मुताबिक किसी बच्चे को अपराध के लिए तब तक सजा नहीं दी जा सकती जब तक की उसकी उम्र सात साल ना हो। इस प्रकार सात तक के बच्चों के खिलाफ ना कोई रिपोर्ट दर्ज होगी ना ही गिरफ्तारी होगी।

♦ कानून के अनुसार किसी भी नाबालिग को जेल या पुलिस हिरासत में नहीं रखा जा सकता। विशेष संरक्षण प्राप्त होने के कारण पुलिस नाबालिग आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकती। उन्हें विशेष पुलिस इकाई ही अभिरक्षा में ले सकती है। पकड़े गए बच्चे को किशोर पुलिस यूनिट या किसी नामित अधिकारी को सौंपा जाता है।

♦ उसके माता-पिता को उससे हुए अपराध और अभिरक्षा में लेने आदि के कारण की सूचना देना अनिवार्य है।

♦ नाबलिग को 24 घंटे में बाल न्याय बोर्ड के समक्ष पेश करना होता है।

गैरकानूनी गिरफ्तारी या हिरासत में मारपीट हो तो करें शिकायत

आप बिल्कुल आश्वस्त रहें कि पुलिस आपके साथ कतई मनमानी नहीं कर सकती। जब आपको गिरफ्तार किया जाता है और बिना प्राथमिकी या मामला दर्ज किए थाने में रोककर रखा जाता है तो इसे गैर-कानूनी गिरफ्तारी कहते हैं। अगर पुलिस किसी को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार करती है तो यह न सिर्फ भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के भी खिलाफ है।

♦ अगर पुलिस ने आपके किसी रिश्तेदार, दोस्त या परिचित को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेकर थाने में बिठा रखा है, मारपीट की है तो इसकी शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए आप उस क्षेत्र के मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण या जिला पुलिस अधीक्षक अथवा किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से भी मिलकर या रजिस्टर्ड डाक से जानकारी दे सकते हैं। वे संबंधित पुलिस अधिकारी से जवाब तलब कर विभागीय कार्यवाही करेंगे। आप पुलिस अधीक्षक की कार्यवाही से संतुष्ट नहीं है तो पुलिस महानिदेशक, गृहमंत्री और मानवाधिकार आयोग को भी शिकायत कर सकते हैं।

♦ पीडि़त के परिजन या मित्र भी उस पुलिस अधिकारी या अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा सकते हैं जिन्होंने आपकी गैर-कानूनी गिरफ़्तारी की हो या आपको रोक कर रखा हो। पीडि़त पक्ष सीधे सुप्रीम कोर्ट भी जा सकता है। वह गैर-कानूनी रूप से गिरफ़्तार व्यक्ति को छोड़े जाने के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण के रिट का सहारा ले सकते हैं। कोर्ट स्थानीय पुलिस को गिरफ्तार व्यक्ति को उसके समक्ष पेश करने का आदेश देगा। उनको कोर्ट की अवमानना का दोषी भी ठहराया जा सकता है।

♦ अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए आप क्षतिपूर्ति की मांग करते हैं तो गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी को आर्थिक क्षतिपूर्ति करनी पड़ सकती है।

बचाव के उपाय निर्दोष के लिए, अपराधी के लिए नहीं

दरअसल आपराधिक विधि में पीडि़त पक्षकार को न्याय देने के लिए आरोपी को गिरफ्तार किया जाना आवश्यक है। अत: गिरफ्तारी के संबंध में ऐसी कोई भी रोक नहीं लगाई गई है जिस पर पुलिस अधिकारी को किसी को गिरफ्तारी करने में कोई भी परेशानी हो। दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी संबंधी पर्याप्त शक्तियां दी गई हैं। पुलिस पूछे तो अपना नाम और पता बताने से इनकार नहीं करें या गलत नाम या पता न दें। ऐसा करने पर आपको गिरफ्तार किया जा सकता हैं। एक पुलिस अधिकारी अपराध के स्वरूप और उसकी गंभीरता को देखते हुए किसी व्यक्ति को वारंट पर या बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकता है। एक निजी व्यक्ति भी किसी घोषित अपराधी या किसी अन्य ऐसे व्यक्ति को, जिसने उसकी उपस्थिति में गैर-जमानती संज्ञेय अपराध किया हो, गिरफ्तार कर पुलिस को सौंप सकता है।

♦ यदि पुलिस अधिकारी इस बात से संतुष्ट हो कि समुचित जांच के लिए या आपको और अपराध करने से रोकने के लिए गिरफ्तारी जरूरी है, यदि आप पर किसी संज्ञेय अपराध में शामिल होने का संदेह हो या ऐसे अपराध में आपके शामिल होने की शिकायत मिली हो, आपके पास चोरी का सामान पाया जाता है या घर में सेंध लगाने का औजार-जैसे क्रॉसबार, सरिया या शीशा काटने का औजार मिलता है और जिसका आपके पास होने का, आप कोई कारण नहीं बता पाते हैं तो गिरफ्तारी होगी।

♦ आप कानून के तहत घोषित अपराधी है, किसी पुलिस अधिकारी के कर्तव्यों के निर्वाहन में बाधा डालते हैं, आप कानूनी हिरासत से भाग गए हैं या भागने का प्रयास किया है तो आपको गिरफ्तार किया जा सकता है।

♦ यदि आपको न्यायालय द्वारा दोषी पाया गया है और आपने स्वयं को पुलिस को नहीं सौंपा है तो आप बगैर वारंट के भी गिरफ़्तार किए जा सकते हैं। इसी प्रकार आप पर संदेह होता है कि आप किसी भी सैन्य बल के भगोड़े हैं या एक संदिग्ध या आदतन अपराधी हैं तो भी पुलिस अधिकारी आपको गिरफ्तार कर सकता है।

♦ पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में यदि गिरफ्तार होने वाला व्यक्ति कोई संज्ञेय अपराध करता है तो पुलिस अधिकारी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है।

 

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