
राजस्थान प्रशासनिक सेवा-आएएस परीक्षा का आयोजन राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से किया जाता है। यह राज्य स्तरीय सिविल सेवा भर्ती परीक्षा है। परीक्षा को राजस्थान राज्य अधीनस्थ सेवा संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के रूप में भी जाना जाता है। राज्य सेवा में मुख्य रूप से राजस्थान प्रशासनिक सेवा-आरएएस, राजस्थान पुलिस सेवा-आपीएस, लेखा सेवा, ग्रामीण विकास सेवा,वाणिज्यकर सेवा, परिवहन सेवा, सहकारिता सेवा, उद्योग सेवा,देवस्थान सेवा, खाद्य एवं आपूर्ति आदि 22 सेवाएं इत्यादि और अधिनस्थ सेवा में तहसीलदार सेवा, कनिष्ठ वाणिज्यकर अधिकारी, आबकारी निरीक्षक, सहकारी निरीक्षक आदि 14 पद शामिल होते हैं।
राजस्थान प्रशासनिक सेवा के लिए योग्यता
प्रशासनिक सेवा परीक्षा में भाग लेने के लिए अभ्यर्थी को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। आप किसी भी संकाय में स्नातक उत्तीर्ण हो सकते हैं। अभ्यर्थी की आयु 21 वर्ष से 40 वर्ष के बीच में हो सकती है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार छूट प्रदान की जाती है।
राजस्थान प्रशासनिक सेवा एक्जाम पैटर्न
राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा के लिए राजस्थान राज्य लोक सेवा आयोग के द्वारा विज्ञापन जारी किया जाता है। इसके बाद इसके लिए परीक्षा का आयोजन किया जाता है। परीक्षा कुल तीन चरण में होती है-प्रारंभिक परीक्षा (प्रीलिम्स या प्री), मुख्य परीक्षा (मैन्स) और साक्षात्कार (इंटरव्यू)। सबसे पहले अभ्यर्थी को प्री एग्जाम में भाग लेना होता है। प्री परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थी ही मेन यानी मुख्य परीक्षा में भाग ले सकते हैं। मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है।
राजस्थान प्रशासनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा
आरएएस प्रीलिम्स एग्जाम में सामान्य ज्ञान और सामान्य विज्ञान से जुड़े ऑब्जेक्टिव टाइप यानी वस्तुनिष्ठ प्रकार के 150 प्रश्न आते हैं। यह 200 अंकों का होता है। सभी प्रश्न समान अंक के होंगे। उम्मीदवारों को तीन घंटे की अवधि में पेपर करना होता है। प्रारंभिक परीक्षा केवल स्क्रीनिंग टेस्ट है। इसकी प्रकृति क्वालिफाइंग होती है। इसमें प्राप्त अंकों को मुख्य परीक्षा या साक्षात्कार के अंकों के साथ नहीं जोड़ा जाता है।
मूल्यांकन में नेगटिव मार्किंग होती है। प्रत्येक गलत उत्तर के लिए एक तिहाई यानि 1/3 अंक काटे जाएंगे। यदि अभ्यर्थी द्वारा उत्तर नहीं दिया जाता है तो उस प्रश्न के लिए कोई दण्ड नहीं होगा। यदि अभ्यर्थी किसी प्रश्न का एक से अधिक उत्तर देता है, तो उस उत्तर को गलत माना जाएगा।
प्रश्नपत्र दो भाषाओं-हिंदी एवं अंग्रेजी में दिए जाते हैं। प्रश्न की भाषा सम्बन्धी किसी भी विवाद की स्थिति में अंग्रेजी भाषा में छपे प्रश्नों को वरीयता दी जाती है।
आरएएस प्रीलिम्स एग्जाम में राजस्थान राज्य विशेष के सन्दर्भ में लगभग 55-60 प्रश्न पूछे जाते हैं। कुल 150 प्रश्नों में से इतने अधिक प्रश्न केवल राजस्थान राज्य विशेष के सन्दर्भ में पूछा जाना इस विषय की महत्ता को स्पष्ट करता है। राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत तथा राजस्थान की समसामयिक घटनाओं पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसी प्रकार पूरे पाठ्यक्रम का राजस्थान राज्य के सन्दर्भ में अध्ययन करना लाभदायक रहता है।
आरएएस प्रारंभिक परीक्षा में सफलता के टिप्स
मॉक टेस्ट से मिलेगा फायदा
प्रारम्भिक परीक्षा के लिये मॉक टेस्ट देना अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है। इसका सबसे बड़ा फायदा है कि आप परीक्षा में होने वाले तनाव पर नियंत्रण पाना सीख जाते हैं। साथ ही इससे समय प्रबंधन की क्षमता बेहतर होती है। बार-बार अभ्यास करने से गति बढ़ाई जा सकती है। मॉक टेस्ट देने से आपको यह अनुमान होता रहता है कि प्रतिस्पर्धियों की तुलना में आपका स्तर क्या है।
मॉक टेस्ट के दौरान यह प्रयोग कर सकते हैं कि प्रश्नों को किस क्रम में करने से आप सबसे बेहतर परिणाम तक पहुंच पा रहे हैं। प्रत्येक टेस्ट में देखें कि किस वर्ग के प्रश्न कितने समय में हो पाते हैं। ज़्यादा समय लेने वाले प्रश्नों को पहले ही पहचान लेंगे तो परीक्षा में समय बर्बाद नहीं होगा। बेहतर होगा कि 4-5 प्रश्नों के उत्तर निकालकर उन्हें ओएमआर शीट पर भरते जाएं। हर प्रश्न के साथ उसे शीट पर भरने में ज़्यादा समय खर्च होता है।
दूसरी ओर कभी-कभी ऐसा भी होता है कि कई उम्मीदवार अंत में एक साथ ओएमआर शीट भरना चाहते हैं पर समय की कमी के कारण उसे भर ही नहीं पाते। ऐसी दुर्घटना से बचने के लिये सही तरीका यही है कि आप 4-5 प्रश्नों के उत्तरों को एक साथ भरते चलें। चूंकि गोलों को काले या नीले बॉल पॉइंट पेन से भरना होता है, अत: उन्हें भरते समय विशेष सावधानी रखें। व्हाइटनर का प्रयोग कदापि न करें।
प्रश्नों को हल करने का क्रम तय कर लें
प्रश्नों का समाधान किस क्रम में करना चाहिए, क्या किसी विशेष क्रम से फायदा होता है-इसका उत्तर सभी के लिये एक नहीं हो सकता। अगर आप सामान्य ज्ञान एवं सामान्य विज्ञान के सभी विषयों में सहज हैं और आपकी गति भी संतोषजनक है तो आप किसी भी क्रम में प्रश्न हल करके सफल हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बेहतर यही होता है कि जिस क्रम में प्रश्न आते जाएं, उसी क्रम में उन्हें करते हुए बढ़ें।
किन्तु अगर आपकी स्थिति इतनी सुरक्षित नहीं है तो आपको प्रश्नों के क्रम पर विचार करना चाहिए। ऐसी स्थिति में आप सबसे पहले, उन प्रश्नों को हल करें जो सबसे कम समय लेते हैं। यदि आपकी राजस्थान राज्य विशेष के सन्दर्भ में पकड़ अच्छी है तो है आपको इससे सम्बंधित पूछे जाने वाले 55 से 60 प्रश्नों को पहले हल कर लेना चाहिए। उनमें समय कम लगेगा और उत्तर ठीक होने की संभावना ज्यादा होगी। ये प्रश्न हल करने के बाद आपकी स्थिति काफी मजबूत हो चुकी होगी।
इसके बाद, आप तेज़ी से वे प्रश्न करते चलें जिनमें आप सहज हैं और उन्हें छोड़ते चलें जो आपकी समझ से परे हैं। जिन प्रश्नों के संबंध में आपको लगता है कि वे पर्याप्त समय मिलने पर किये जा सकते हैं, उन्हें कोई निशान लगाकर छोड़ते चलें।
एक सुझाव यह भी हो सकता है कि एक ही प्रकार के प्रश्न लगातार करने से बचें। अगर आपको ऐसा लगे तो बीच में तार्किक विवेचन एवं मानसिक योग्यता के कुछ सवाल हल कर लें उसके बाद अन्य प्रश्नों को हल करें।
सभी प्रश्नों के अंक समान होने तथा गलत उत्तर के लिये ऋणात्मक अंक के प्रावधान के कारण तुक्का पद्धति से बचते हुए सावधानीपूर्वक प्रश्नों को हल करें।
गणित में कमजोर हैं तो अभ्यास करें
प्रारंभिक परीक्षा में तार्किक विवेचन एवं मानसिक योग्यता से लगभग 20-30 प्रश्न पूछे जाते हैं जो मुख्यत: मैट्रिक स्तर के होते हैं। इनकी प्रकृति साधारण होती है। अत: थोड़ा प्रयास करने से हल हो जाते हैं। यदि आप तार्किक विवेचन में कुछ ऐसे टॉपिक तैयार कर लेते हैं, जो आपको समझ में आते हैं और जिनसे प्राय: सवाल भी पूछे जाते हैं। उदाहरण के लिए अगर आप श्रेणी जैसे सीरीज, कोडिंग-डिकोडिंग के टॉपिक तैयार कर लेते हैं तो इससे सम्बंधित 5-7 प्रश्न ठीक हो जाएंगे। इसी प्रकार यदि सारणीयन और पाई.चित्र का अभ्यास कर लिया जाए तो 5-8 प्रश्न और ठीक हो जाएंगे। अत: गणित में कमजोर होने के बावजूद इनका अभ्यास करके आप आसानी से इस खंड के 50 फीसदी से अधिक प्रश्नों को सही कर सकते हैं।
आरएएस प्री एक्जाम का कट आफ
परीक्षा के कट आफ की प्रकृति स्थिर नहीं है। इसमें हर साल उतार चढ़ाव होता रहता है। इसका निर्धारण सीटों की संख्या, प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर तथा उम्मीदवारों की संख्या व गुणवत्ता जैसे कारकों पर निर्भर करता है। अगर प्रश्नपत्र सरल होंगे या उम्मीदवारों की संख्या व गुणवत्ता ज्यादा होगी तो कट ऑफ बढ़ जाएगा और विपरीत स्थितियों में अपने आप कम हो जाएगा। ऋणात्मक अंक के प्रावधान के कारण इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये सामान्यत: 40-50 फीसदी अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। किन्तु कभी-कभी प्रश्नों के कठिनाई स्तर को देखते हुए यह प्रतिशत और भी कम हो सकता है। जैस वर्ष 2018 की आरपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा का कट.ऑफ 76.6 अंक था जो 40 फीसदी से भी कम है।
राजस्थान प्रशासनिक सेवा मुख्य परीक्षा
प्रारम्भिक परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों के लिये मुख्य परीक्षा होती है। विभिन्न सेवाओं और पदों की-उस वर्ष में भरी जाने वाली रिक्तियों की कुल अनुमानित संख्या से 15 गुणा अभ्यर्थियों को ही मुख्य परीक्षा के लिए बुलाया जाता है।
मुख्य परीक्षा कुल 800 अंकों की होती है। इसमें चार पेपर-सामान्य अध्ययन के तीन और सामान्य हिंदी व सामान्य अंग्रेजी का एक प्रश्न पत्र होता हैं। प्रत्येक प्रश्नपत्र के लिये 200-200 अंक तय है।
यह एक वर्णनात्मक, विश्लेषणात्मक प्रकार की लिखित परीक्षा है। इसमें संक्षिप्त, मध्यम और दीर्घ शब्द सीमा वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। इन सभी प्रश्नों के उत्तर को आयोग द्वारा दी गयी उत्तर पुस्तिका में निर्धारित शब्दों में अधिकतम तीन घंटे की समय सीमा में लिखना होता है।
परीक्षा के इस चरण में सफलता प्राप्त करने के लिए सामान्यत:60-65प्रतिशत अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है।
राजस्थान प्रशासनिक सेवा मुख्य परीक्षा सफलता के टिप्स
-सिलेबस को ध्यान से पढ़े और समझेंं
-स्तरीय और मानक पुस्तकों को तैयारी का आधार बनाएं। एक विषय पर दस पुस्तकें पढऩे के बजाय एक ही मानक पुस्तक को दस बार पढऩा बेहतर होगा।
-मन लगाकर पढ़ें और समय समय प रिविजन भी करें।
-अपने नोट्स बनाएं। उत्तर लिखने का अभ्यास करते रहें। उत्तर स्पष्ट, व्यवस्थित और साफ-सुथरा लिखें।
-करंट अफेयर्स के लिए लगातार अपडेट रहें।
-मोकटेस्ट देते रहें।
राजस्थान पर केन्द्रित विषयों पर फोकस करें
प्रीलिम्स परीक्षा के समान, मेन्स में भी राजस्थान पर केन्द्रित विषयों पर फोकस करना चाहिए। चार अनिवार्य प्रश्नपत्रों में से सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्नपत्र, सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र एवं सामान्य अध्ययन तृतीय प्रश्नपत्र के सभी महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन राजस्थान के सन्दर्भ में करना आवश्यक है। क्योंकि लगभग सभी महत्वपूर्ण प्रश्न राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत, भूगोल, अर्थव्यवस्था, राजव्यवस्था एवं समसामयिक गतिविधियों इत्यादि से जुड़ा रहता है। आरपीएससी की मुख्य परीक्षा में राजस्थान राज्य विशेष के प्रश्नों को तैयार करने के लिये किसी विशेष अध्ययन सामग्री की आवश्यकता नहीं होती है बल्कि प्रारम्भिक परीक्षा के दौरान तैयार किये गए प्रश्नों का ही विस्तृत अध्ययन करने की आवश्यकता होती है।
अंग्रेजी से डरें नहीं
मुख्य परीक्षा में चतुर्थ प्रश्नपत्र भाषागत ज्ञान से सम्बंधित है जिसमें सामान्य हिंदी एवं सामान्य अंग्रेजी के संबंध में कुल 200 अंक के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें सामान्य अंग्रेजी के 80 अंक के प्रश्न पूछे जाते हैं जिसका स्तर सीनियर सेकेंडरी स्तर का होता है। इसके अंतर्गत अंग्रेजी व्याकरण, कॉम्प्रिहेंशन, ट्रांसलेशन, प्रेसी राइटिंग, लेटर राइटिंग, पैराग्राफ राइटिंग इत्यादि के प्रश्न पूछे जाते हैं। सच यह है कि अंग्रेजी में दिए गए बोधगम्यता एवं व्याकरण के प्रश्न काफी आसान भाषा में होते हैं और बहुत कमज़ोर विद्यार्थी भी इसका नियमित अभ्यास करके औसत अंक प्राप्त कर सकते हैं।
हिंदी से मिलेगी ताकत
इसमें सामान्य हिंदी के 120 अंक के प्रश्न पूछे जाते हैं जिसका स्तर सीनियर सेकेंडरी स्तर का होता है। इसके अंतर्गत हिंदी व्याकरण, संक्षिप्तीकरण, पत्र-लेखन एवं निबंध लेखन इत्यादि के प्रश्न पूछे जाते हैं। सच यह है कि हिंदी व्याकरण के यह प्रश्न काफी आसान होते हैं और बहुत कमज़ोर विद्यार्थी भी इसका नियमित अभ्यास करके अंक प्राप्त कर सकते हैं।
गणित और तार्किक दक्षता मानसिक योग्यता का अभ्यास करें
सामान्य अध्ययन के द्वितीय प्रश्नपत्र में तार्किक दक्षता मानसिक योग्यता और संख्यनन पाठ्यक्रम का हिस्सा है। इस खंड के लिये अंकगणित के अवधारणात्मक पहलुओं के साथ सांख्यिकीय से सम्बंधित अवधारणाओं एवं प्रश्नों का अभ्यास अत्यंत आवश्यक है। इन प्रश्नों की प्रकृति साधारण होती है अत: थोड़ा प्रयास करने से हल हो जाते हैं। प्रश्नों का अभ्यास पूर्व में पूछे गए प्रश्नों को विभिन्न खंडों में वर्गीकृत कर के किया जा सकता है। हो सके तो गणित में कुछ ऐसे टॉपिक तैयार कर लीजिए जो आपको समझ में आते हैं और जिनसे प्राय: सवाल भी पूछे जाते हैं। निरंतर अभ्यास से इस प्रश्नपत्र में बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है। चूँकि तार्किक दक्षता, मानसिक योग्यता और संख्यनन के प्रश्नों का सही उत्तर देने पर आप को पूर्ण अंक प्राप्त होता है। अत: थोड़े से प्रयास में इस खंड में बेहतर प्रदर्शन करके मुख्य परीक्षा में अच्छा अंक प्राप्त किया जा सकता है।
राजस्थान प्रशासनिक सेवा साक्षात्कार
साक्षात्कार के लिये 100 अंक निर्धारित हैं। मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर ही अंतिम रूप से मेधा सूची यानी मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है, इसलिए अंतिम चयन एवं पद निर्धारण में साक्षात्कार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है। जिसमें आयोग के सदस्यों द्वारा मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं जिसका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से देना होता है। आरपीएससी के साक्षात्कार में सामान्य परिस्थितियों में आप न्यूनतम 40 अंक तथा अधिकतम 70 अंक प्राप्त कर सकते हैं। यद्यपि साक्षात्कार इस परीक्षा का अंतिम चरण है लेकिन इसकी तैयारी प्रारंभ से ही शुरू कर देना लाभदायक रहता है। वास्तव में किसी भी अभ्यर्थी के व्यक्तित्व का विकास एक निरंतर प्रक्रिया है।
आरएएस परीक्षा सिलेबस
राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत
राजस्थान के इतिहास की महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं, प्रमुख राजवंश, उनकी प्रशासनिक व राजस्व व्यवस्था। सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दे
स्वतंत्रता आन्दोलन, जनजागरण व राजनीतिक एकीकरण
स्थापत्य कला की प्रमुख विशेषताएं-किले एवं स्मारक
कला, त्रिकला और हस्तशिल्प
राजस्थानी साहित्य की महत्वपूर्ण कृतियां, क्षेत्रीय बोलियां
मेले, त्यौहार, लोक संगीत एवं लोक नृत्य
राजस्थानी संस्कृति, परम्परा एवं विरासत
राजस्थान के धार्मिक आन्दोलन, संत एवं लोक देवता
महत्पूर्ण पर्यटन स्थल
राजस्थान के प्रमुख व्यकित्व
भारत का इतिहास
प्राचीनकाल एवं मध्यकाल, प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत के इतिहास की प्रमुख विशेषताएं एवं महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं, कला, संस्कृति, साहित्य एवं स्थापत्य
प्रमुख राजवंश, उनकी प्रशासनिक सामाजिक व आर्थिक व्यवस्था
सामाजिक सांस्कृतिक मुद्दे, प्रमुख आन्दोलन
आधुनिक काल
आधुनिक भारत का इतिहास (18वीं शताब्दी के मध्य से वर्तमान तक) प्रमुख घटनाएं, व्यक्तित्व एवं मुद्दे
स्वतंत्रता संघर्ष एवं भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन. विभिन्न अवस्थाएं, इनमें देश के विभिन्न क्षेत्रों के योगदानकर्ता एवं उनका योगदान, 19वीं एवं 20वीं शताब्दी में सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आन्दोलन, स्वातंत्र्योत्तर काल में राष्ट्रीय एकीकरण एवं पुनर्गठन
विश्व एवं भारत का भूगोल
प्रमुख भौतिक विशेषताएं
पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकीय मुद्दे
वन्य जीव-जन्तु एवं जैव-विविधता
अन्तर्राष्ट्रीय जलमार्ग
प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र
भारत का भूगोल
प्रमुख भौतिक विशेषताएं और मुख्य भू.भौतिक विभाजन
कृषि एवं कृषि आधारित गतिविधियां
खनिज.लोहा, मैंगनीज, कोयला, खनिज तेल और गैस, आणविक खनिज
प्रमुख उद्योग एवं औद्योगिक विकास
परिवहन-मुख्य परिवहन मार्ग
प्राकृतिक संसाधन
पर्यावरणीय समस्याएं तथा पारिस्थितिकीय मुद्दे
राजस्थान का भूगोल
प्रमुख भौतिक विशेषताएं और मुख्य भू-भौतिक विभाग
राजस्थान के प्राकृतिक संसाधन
जलवायु, प्राकृतिक वनस्पति, वन, वन्य जीव.जन्तु एवं जैव.विविधता
प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं, खान एवं खनिज सम्पदाएं
जनसंख्या।
भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन प्रणाली
संवैधानिक विकास एवं भारतीय संविधान
भारतीय शासन अधिनियम
1919 एवं 1935, संविधान सभा, भारतीय संविधान की प्रकृतिए प्रस्तावना, उद्देश्यिका-मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत, मौलिक कर्तव्य, संघीय ढांचा, संवैधानिक संशोधन, आपातकालीन प्रावधान, जनहित याचिका और न्यायिक पुनरावलोकन।
भारतीय राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन
भारत राज्य की प्रकृति, भारत में लोकतंत्र, राज्यों का पुनर्गठन, गठबंधन सरकारें, राजनीतिक दल, राष्ट्रीय एकीकरण
संघीय एवं राज्य कार्यपालिका, संघीय एवं राज्य विधान मण्डल, न्यायपालिका
राष्ट्रपति, संसद, सर्वोच्च न्यायालय, निर्वाचन आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक,योजना आयोग, राष्ट्रीय विकास परिषद, मुख्य सर्तकता आयुक्त, मुख्य सूचना आयुक्त, लोकपाल एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
स्थानीय स्वायत्त शासन एवं पंचायती राज, लोक नीति एवं अधिकार लोक कल्याणकारी राज्य के रूप में राष्ट्रीय लोकनीति
विभिन्न विधिक अधिकार एवं नागरिक अधिकार-पत्र
राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था
राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य विधानसभा, उच्च न्यायालयए राजस्थान लोक सेवा आयोग, जिला प्रशासन, राज्य मानवाधिकार आयोग, लोकायुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य सूचना आयोग, लोक नीति, विधिक अधिकार एवं नागरिक अधिकार-पत्र
अर्थशास्त्रीय अवधारणाएं एवं भारतीय अर्थव्यवस्था
अर्थशास्त्र के मूलभूत सिद्धान्त
बजट निर्माण, बैंकिंग, लोक-वित्त, राष्ट्रीय आय, संवृद्धि एवं विकास का आधारभूत ज्ञान
लेखांकन, अवधारणा, उपकरण एवं प्रशासन में उपयोग
स्टॉक एक्सचेंज एवं शेयर बाजार
राजकोषीय एवं मौद्रिक नीतियां
सब्सिडी, लोक वितरण प्रणाली
ई-कॉमर्स
मुद्रास्फीति. अवधारणा, प्रभाव एवं नियंत्रण
आर्थक विकास एवं आयोजन
पंचवर्षीय योजना .लक्ष्यए रणनीति एवं उपलब्धियां
अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्र-कृषि, उद्योग, सेवा एवं व्यापार, वर्तमान स्थिति, मुद्दे एवं पहल
प्रमुख आर्थिक समस्याएं एवं सरकार की पहल, आर्थिक सुधार एवं उदारीकरण
मानव संसाधन एवं आर्थिक विकास
मानव विकास सूचकांक
गरीबी एवं बेरोजगारी-अवधारणा, प्रकार, कारण, निदान एवं वर्तमान फ्लेगशिप योजनाएं
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता-कमजोर वर्गों के लिए प्रावधान।
राजस्थान की अर्थव्यवस्था
अर्थव्यवस्था का वृहत् परिदृश्य
कृषि, उद्योग व सेवा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे
संवृद्धि, विकास एवं आयोजना
आधारभूत-संरचना एवं संसाधन, प्रमुख विकास परियोजनाएं
कार्यक्रम एवं योजनाएं-अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों, नि:शक्तजनों, निराश्रितों, महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों, कृषकों एवं श्रमिकों के लिए राजकीय कल्याणकारी योजनाएं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
विज्ञान के सामान्य आधारभूत तत्व
इलेक्ट्रॉनिक्सए कम्प्यूटर्स, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी
उपग्रह एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
रक्षा प्रौद्योगिकी
नैनो-प्रौद्योगिकी
मानव शरीर, आहार एवं पोषण, स्वास्थ्य देखभाल
पर्यावरणीय एवं पारिस्थिकीय परिवर्तन एवं इनके प्रभाव
जैव.विविधता, जैव-प्रौद्योगिकी एवं अनुवांशिकीय-अभियांत्रिकी
राजस्थान के विशेष संदर्भ में कृषि-विज्ञान, उद्यान-विज्ञान, वानिकी एवं पशुपालन
राजस्थान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विकास
तार्किक विवेचन एवं मानसिक योग्यता
तार्किक दक्षता(गिमनात्मक, आगमनात्मक, अपवर्तनात्मक)
कथन एवं मान्यतायें, कथन एवं तर्क, कथन एवं निष्कर्ष, कथन-कार्यवाही
विश्लेषणात्मक तर्कक्षमता
मानसिक योग्यता
संख्या श्रेणी, अक्षर श्रेणी, बेमेल छांटना, कूटवाचन (कोडिंग-डीकोडिंग) संबंधों-आकृतियों एवं उनके उपविभाजन से जुडी समस्याएं
आधारभूत संख्यात्मक दक्षता
गणितीय एवं सांख्यकीय विश्लेषण का प्रारम्भिक ज्ञान
संख्या से जुडी समस्याएं व परिमाण का क्रम, अनुपात तथा समानुपात, प्रतिशत, साधारण एवं चक्रवृद्धि ब्याज, आंकडों का विश्लेषण (सारणी, दण्ड-आरेख, रेखाचित्र, पाई-चार्ट)
समसामयिक घटनाएं, राजस्थान राज्यस्तरीय, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय महत्व की प्रमुख समसामयिक घटनाएं एवं मुद्दे
वर्तमान में चर्चित व्यक्ति एवं स्थान
खेल एवं खेलकूद संबंधी गतिविधियां।
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धन्यवाद राजकुमारजी