राजस्थान सरकार ने पहली से 5वीं तक के बच्चों को बिना परीक्षा के ही प्रमोट करने का फैसला किया है। अब सरकारी स्कूलों में 5वीं कक्षा तक मौजूदा एकेडमिक ईयर में कोई भी परीक्षा नहीं होगी। विद्यार्थी को असेसमेंट के आधार पर अगली क्लास में प्रमोट किया जाएगा। स्माइल-1, स्माइल-2 और आओ घर से सीखें के तहत लिए जाने वाले असेसमेंट टेस्ट में मिले नम्बर के आधार पर पास किया जाएगा।
30 लाख को दो क्लास का जम्प, तीसरी के बाद सीधे छठी की परीक्षा
राजस्थान के करीब 30 लाख स्टूडेंट्स को लगातार दो कक्षाओं का जंप मिल गया है। खास बात ये है कि जो बच्चे इस बार 5वीं में प्रमोट हुए हैं, उन्होंने चौथी कक्षा की परीक्षा भी नहीं दी थी। इन बच्चों को तीसरी के बाद सीधे कक्षा छह की परीक्षा देनी होगी। सेशन 2019-20 में कक्षा एक में प्रवेश लेने वाले बच्चे तो सीधे तीसरी कक्षा की परीक्षा देंगे। इन बच्चों ने अपने जीवन में अब तक वार्षिक परीक्षा नहीं दी है। ऐसी ही स्थिति कक्षा एक से पांच के बीच के सभी 75 लाख बच्चों की है।
पिछले साल 16 मार्च से ही बंद हैं प्राइमरी स्कूल
कोरोना संक्रमण को देखते हुए राज्य सरकार ने गत वर्ष 16 मार्च को प्रदेश में सभी सरकारी व गैर सरकारी स्कूल बंद करा दिए थे। इसके बाद 22 मार्च को राज्य के सभी शिक्षकों को भी छुट्टी दे दी गई थी। हालांकि, टीचर्स बाद में कोरोना की ड्यूटी में लगाए गए थे। राजस्थान में कक्षा 1 से 5वीं तक के क्लास रूम एक साल से बंद हैं।
कक्षा 9 और 11 की परीक्षा 22 अप्रैल से 3 मई तक
वर्तमान सत्र में 9वीं और 11वीं क्लास के विद्यार्थियों की परीक्षा 22 अप्रैल से 3 मई तक जिला समान परीक्षा योजना के तहत ही होगी। 11वीं की प्रायोगिक परीक्षा 20 से 24 अप्रैल के बीच होगी। परिणाम 9 मई को जारी होगा। प्रवेश प्रक्रिया 10 मई से शुरू होगी।
कक्षा 6-7वीं की परीक्षा 15 अप्रैल से, नतीजा 30 को
स्कूल स्तर पर छठी और सातवीं की परीक्षाएं 15 से 22 अप्रैल तक करवाई जाएंगी। जिले में स्थानीय अवकाश होने पर वह परीक्षा 23 या 24 अप्रैल को करवाई जा सकेगी। इन कक्षाओं का परिणाम 30 अप्रैल को घोषित कर दिया जाएगा। इसके बाद 1 मई प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी।
परीक्षा पैटर्न में बदलाव
शिक्षा विभाग का मानना है कि बच्चे लॉकडाउन के चलते ज्यादातर पढ़ाई भूल गए हैं। इसीलिए छठी और सातवीं का पेपर इस बार ऐसा रखा जा रहा है कि ज्यादा दिक्कत न हो। रिकॉल के लिए बच्चों से पिछली कक्षा के सवाल भी पूछे जाएंगे। स्टूडेंट्स को राहत देने के लिए सिलेबस में भी कटौती की गई है।


