
-जेईई में कम रैंक आने से निराश कतई ना हो
हर साल लाखों बच्चे जेईई एग्जाम देकर आईआईटी और एनआईटी में दाखिले का सपना देखते हैं, लेकिन सभी को इनमें सीट नहीं मिलती। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अब कोई अच्छा मौका नहीं बचा। क्या आपको भी जेईई मेंस में अच्छी रैंक नहीं मिली है…आप और भी कई तरीकों से इंजीनियरिंग के अच्छे कॉलेजों में दाखिले का सपना पूरा कर सकते हैं। याद रखिए जेईई एक एग्जाम है जिंदगी नहीं है। रास्ते बहुत हैं बस आपको अपने लिए सही ऑप्शन चुनना है।
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जनवरी सेशन में करीब 13 लाख 78 ने आवेदन किया। इनमें से 13 लाख ने एग्जाम दिया। यह संख्या गत वर्ष से 1.47 लाख अधिक है। आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपल आईटी की बात करें तो इनकी कुल संख्या 80 है। इनमें 23 आईआईटी, 31 एनआईटी और 26 ट्रिपल आईटी है। 2024 के जोसा सीट मैट्रिक्स के मुताबिक इनमें सीटों की कुल संख्या करीब 60 हजार है। करीब ढाई लाख स्टूडेंट जेईई एडवांस के लिए क्वालीफाई करते हैं। इनमें से लगभग 44 हजार ही आईआईटी, एनआईटी में एडमिशन तक पहुंच पाते हैं। ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन की एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में 2023 में 23 लाख टूडेंट्स ने स्टूडेंट्स ने बीटेक में कोर्स में दाखिला लिया है।
मेंस एग्जाम के बाद में अगली रणनीति
यह आंकड़े बताने का मतलब सिर्फ इतना ही है कि आईआईटी और एनआईटी के अलावा जहां और भी है। इसलिए जेईई में कम रैंक आने से निराश कतई ना हो। सबसे पहले यह समझिए कि जेई मेंस एग्जाम के बाद में आपकी अगली रणनीति क्या होनी चाहिए। आसान भाषा में समझाएं तो पहला स्टेप यह कि अपना रिजल्ट और रैंक चेक करें। देखें कि आप कहां स्टैंड करते हैं। जेईई एडवांस में, एनआईटी ट्रिपल आईटी में या फिर अन्य कॉलेजे में वैसे आपके पास जेईई मैन्स देने का एक और चांस है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं 1 से 8 अप्रैल के बीच में एग्जाम होंगे। उसके बाद भी अगर जेईई मेंस में रैंक कम आती है तो घबराए नहीं। आपके पास ऑप्शन बहुत से हैं। हम एक-एक करके सभी ऑप्शंस के बारे में डिटेल में बताएंगे।
जेईई एडवांस देकर लें आईआईटी में एडमिशन
यह जान ले कि यदि आपने जेईई मेंस में टॉप दो-ढाई लाख में जगह बना ली है तो आप जेई एडवांस के लिए क्वालीफाई है। जेईई एडवांस सिर्फ आईआईटी में ही एडमिशन नहीं दिलाता है बल्कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस-आईआईएससी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च-आईआईएसआर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी-आईआई एसटी, राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी आरजीआईपीटी जैसे टॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट्स में भी दाखिले का मौका देता है।
जेईई एडवांस की तैयारी करने के लिए आपको सबसे पहले उसका पैटर्न समझना होगा। यह जेई मेंस से ज्यादा कांसेप्ट बेस्ड और कठिन होता है। इस एग्जाम के लिए गहराई से पढ़ाई करने की जरूरत होती है और प्रैक्टिस सबसे ज्यादा जरूरी है। मॉक टेस्ट और पिछले साल के पेपर हल करें ताकि कांसेप्ट क्लियर हो सके।
जोसा काउंसलिंग
जेईई मेंस या एडवांस के बाद में जो चीज सबसे जरूरी होती है वह है जोसा काउंसलिंग। जोसा का मतलब जॉइंट सीट एलोकेशन अथॉरिटी। आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपल आईटी और बाकी जो गवर्नमेंट फंडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट्स में एडमिशन के लिए ऑफिशियल काउंसलिंग इसी के जरिए होती है। इसमें छह राउंड होते हैं। आमतौर पर जिसमें स्टूडेंट्स अपनी रैंक के आधार पर कॉलेज और ब्रांच चुन लेते हैं। अगर रैंक अच्छी है तो जोसा काउंसलिंग में अच्छा कॉलेज मिल जाएगा।
यह काउंसलिंग जून से शुरू होकर जुलाई तक चलेगी। एक टिप यह है कि अगर काउंसलिंग में आपको फर्स्ट चॉइस का कॉलेज नहीं मिलता तो धैर्य रखें। फ्लोट, फ्रीज और स्लाइड का ऑप्शन इस्तेमाल करें। आप सोचेंगे, अब यह क्या होता है। फ्लोट ऑप्शन का मतलब है कि अगर स्टूडेंट को फर्स्ट चॉइस का कॉलेज नहीं मिलता है तो वह फ्लोट ऑप्शन चुन सकता है। इससे उसे बाद के राउंड में हिस्सा लेने का मौका मिल जाता है। फ्रीज विकल्प का मतलब यह कि अगर स्टूडेंट को वर्तमान अलॉटमेंट पसंद है तो इस विकल्प को चुनना चाहिए। तीसरा है स्लाइड ऑप्शन। अगर किसी छात्र को उसी संस्थान में बेहतर अलॉटमेंट चाहिए तो वह स्लाइड ऑप्शन चुन सकता है।
एक राज की बात बताएं अगर आपको जोसा काउंसलिंग में एनआईटी ट्रिपल आईटी में सीट नहीं मिल बाती है और आप इन्हीं संस्थानों में दाखिला लेने का पक्का मन बना चुके हैं तो आपको एक और चांस मिलता है। यह चांस सीएसएबी स्पॉट राउंड ऑप्शन के
जरिए मिलता है। इसमें कम रैंक वाले कई स्टूडेंट्स का भी नंबर लग जाता है।
सेंट्रल सीट एलोकेशन बोर्ड यानी सीएसएबी स्पॉट राउंड आखिर होता क्या है। दरअसल काउंसिलिंग के बाद भी एनआईटी ट्रिपल आईटी में कुछ सीटें बची रह जाती हैं। इन्हें भरने के लिए स्पॉट राउंड काउंसलिंग होती है। यह आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर के महीने में होती है। यह भी एनआईटी और ट्रिपल आईटी में सीट पाने का एक तरीका हो सकता है। ऐसे स्टूडेंट्स की बात करें जिनका जेईई में स्कोर कम है, कोई अच्छा एनआईटी या ट्रिपल आईटी मिलने का चांस भी नहीं है, तब वो किस तरह इंजीनियरिंग का अपना सपना पूरा कर सकते हैं।
प्राइवेट कॉलेज-यूनिवर्सिटी में डायरेक्ट एडमिशन या अन्य एंट्रेंस एग्जाम
एक ऑप्शन प्राइवेट कॉलेज में डायरेक्ट एडमिशन का भी होता है। इसके अलावा कई टॉप प्राइवेट यूनिवर्सिटी और डीम्ड यूनिवर्सिटी जेईई स्कोर के बिना भी एडमिशन देती हैं। इनमें एडमिशन 12वीं के मार्क्स के आधार पर या अपने खुद के एंट्रेंस एग्जाम के आधार पर होता है जो कई बार जेईई से भी आसान होता है।
बिट्स पिलानी, गोवा, हैदराबाद कैंपस के लिए बिटसेट के जरिए एग्जाम लेता है। इसका हाईएस्ट प्लेसमेंट पैकेज करीब 60₹ लाख का होता है। एवरेज पैकेज 30 लाख के आसपास होता है। इसके अलावा वीआईटी प्रवेश परीक्षा होती है। इसका हाईएस्ट पैकेज एक करोड़ से ऊपर रहा है और एवरेज पैकेज करीब 10 लाख मान लीजिए। इसके अलावा एसआरएम यूनिवर्सिटी भी अच्छा विकल्प है। इसमें एडमिशन एसआरएम जेईई के जरिए होता है। इसके हाईएस्ट पैकेज की बात करें तो 52 लाख है। एवरेज पैकेज करीब 9 लाख के आसपास है। इनके अलावा शिव नादर यूनिवर्सिटी, मणिपाल यूनिवर्सिटी, अशोका यूनिवर्सिटी जैसे कुछ अच्छे विकल्प भी हैं।
राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षा
कई राज्य सरकारें भी अपने यहां के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिले के लिए अपनी अलग से प्रवेश परीक्षा आयोजित करती हैं। जैसे कि महाराष्ट्र में एमएचटी सीईटी, पश्चिम बंगाल में डब्ल्यूबी जेईई के जरिए दाखले होते हैं। इनमें जादवपुर यूनिवर्सिटी जैसे अच्छे कॉलेज में दाखिला होता है। कर्नाटक में केसीईटी के जरिए अच्छे कॉलेज मिल जाते हैं और आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी इसी तरह के अलग टेस्ट आयोजित किए जाते हैं।
विदेश से इंजीनियरिंग की पढ़ाई
अगर आपके सपने बड़े हैं और आपको आईआईटी, एनआईटी वगैरह में दाखिला नहीं मिल पा रहा है और आप विदेश जा सकते हैं। वहां भी पढ़ाई के शानदार विकल्प मौजूद हैं।
कुछ पॉपुलर देश हैं जहां पर भारत से काफी बच्चे जाते हैं इनमें जर्मनी है। जर्मनी में पब्लिक यूनिवर्सिटीज में फ्री एजुकेशन का भी विकल्प रहता है। कनाडा में आपको वर्क और स्टडी ऑप्शन मिलता है। यूएसए में हाई जॉब अपॉर्चुनिटी के साथ पढ़ाई करने का मौका मिलता है। ऑस्ट्रेलिया में तो पीआर के लिए आसान रास्ता भी मिल जाता है।
ड्रॉप लेकर तैयारी
अगर आपने ठान लिया है कि आईआईटी या एनआईटी में ही जाना है लेकिन इस बार कम रैंक है तो आप ड्रॉप लेकर अगले साल जेईई भी दे सकते हैं। लेकिन ड्रॉप लेने से पहले यह देख ले कि आप पूरे फोकस अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ में स्टडी कर पाएंगे। अगर आपको संदेह है कि आप उतनी मेहनत नहीं कर पाएंगे या उतना मानसिक दबाब नहीं सहन कर पाएंगे, उतना फोकस नहीं बना के रख पाएंगे तो ड्रॉप लेने से बचने में ही समझदारी होगी।