
केंद्र सरकार कंपनियों में हफ्ते में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी की योजना को मंजूरी दे सकती है। इसके लिए कर्मचारियों को लंबी शिफ्ट में काम करना पड़ेगा पर वीकेंड लम्बा होगा।
जारी रहेगा सप्ताह में 48 घंटे काम करने का नियम
12 घंटे की शिफ्ट वालों को सप्ताह में 4 दिन, 10 घंटे की शिफ्ट वालों को 5 दिन और 8 घंटे की शिफ्ट वालों को सप्ताह में 6 दिन काम करना होगा। सप्ताह में कुल 48 घंटे काम करने का पुराना नियम जारी रहेगा।
नया सप्ताह शुरू करने से पहले देनी होगी छुट्टी
कंपनियों को नया वर्क वीक शुरू करने से पहले कर्मचारियों को छुट्टी देनी होगी। यदि कंपनियां 4 दिन काम का सप्ताह चुनती हैं तो कर्मचारियों को 3 दिन छुट्टी देनी होगी। यदि कोई 5 दिन काम का सप्ताह चुनता हैं तो 2 दिन और 6 दिन काम का नियम चुनता है तो एक की ही छुट्टी होगी।
कर्मचारियों या कंपनियों पर दबाव नहीं
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मुताबिक बदली कार्य संस्कति के साथ तालमेल बनाने के लिए यह प्रावधान किया जा रहा है। यह नियम लेबर कोड का हिस्सा होगा। एक बार नए नियम लागू हो जाएंगे तो कंपनियों को 4 या 5 दिन के सप्ताह के लिए सरकार से मंजूरी की जरूरत नहीं होगी और फ्लेक्सिबिलिटी रहेगी। तीनों शिफ्ट को लेकर कर्मचारियों या कंपनियों पर कोई दबाव नहीं डाला जाएगा। नियमावली में साफ किया जाएगा कि कंपनियों और कामगारों के बीच सहमति से ही विकल्प चुनने का प्रावधान हो। किसी संस्थान में काम करने वाले कामगारों के लिए एक समान व्यवस्था ही अपनाई जा सकेगी। मिसाल के तौर पर अगर कोई संस्थान नई व्यवस्था लागू करता है तो उसे समान रूप से सभी कामगारों पर लागू करना होगा।
फिलहाल ये है नियम
मौजूदा समय में आठ घंटे की शिफ्ट के साथ सप्ताह में छह दिन कार्य होता है और कर्मचारियों को एक दिन की छुट्टी दी जाती है। प्रस्ताव के अनुसार कोई भी कर्मचारी कम से कम आधे घंटे के इंटरवल के बिना पांच घंटे से अधिक लगातार काम नहीं करेगा।
केंद्र सरकार जल्द अधिसूचना कर सकती है जारी
गौरतलब है कि कि संसद ने पिछले साल कामगारों से जुड़े चार बिल पारित किए थे। पारित बिल में वेतन कोड से लेकर सामाजिक सुरक्षा तक के मुद्दे शामिल थे। संसद से पारित इन चारों बिल को कानून का अमली जामा पहनाने के लिए श्रम मंत्रालय ने नियमावली लगभग तैयार कर ली है। इसी के तहत सरकार कामगारों के लिए सप्ताह में चार कामकाजी दिवस और 3 साप्ताहिक छुट्टी रखने का विकल्प देने पर विचार कर रही है। नए ड्रॉफ्ट को लगभग तैयार कर लिया है, जल्द ही इसे लागू भी कर दिया जाएगा। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का कहना है कि हम नियोक्ता या कर्मचारियों पर दबाव नहीं डाल रहे हैं कि वे एक दिन में 12 घंटे काम करें और सप्ताह में तीन दिन की छुट्टी लें। नए नियम लागू होने के बाद भी कर्मचारियों के पास दोनों विकल्प मौजूद रहेंगे। अगर कोई कर्मचारी पुराने नियम के तहत काम कर करने को राजी है तो वह ऐसा कर सकता है। हमने यह फैसला इसलिए लिया है, ताकि कर्मचारियों को छुट्टी में सहूलियत मिल सके।
रोजगार घटेंगे, वर्क-लाइफ बैलेंस पर असर
एक दिन में 12 घंटे काम से 24 घंटे चलने वाली कंपनियों में 1 दिन में सिर्फ 2 शिफ्ट में ही चल पाएंगी। कंपनियों के ऑफिस के किराए व ओपरेटिंग एक्सपेंस कम होंगे। स्टाफ ज्यादा सक्रिय और प्रोडक्टिव रहेगा। जानकारों का कहना है कि इससे आईटी कम्पनियों, बैकिंग सैक्टर, बीपीओ आदि में नौकरियों के मौके घट सकते हैं। लंबी शिफ्ट से कर्मचारियों के वर्क-लाइफ बैलेंस पर भी असर पड़ेगा।