Career in Forensic Science कानून और अपराध के बीच आंख-मिचौनी का खेल हमेशा से चलता रहा है। अपराध और कानून की दौड़ में कभी अपराध आगे, तो कभी कानून पीछे होता है। आधुनिकता के साथ अपराध के तरीके बढ़े हैं, तो छानबीन के तरीके भी इजाद हुए हैं। इसलिए कानून कहीं न कहीं अपराध को पछाड़ ही देता है। दरअसल अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, वह कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है। इन्हीं बारीक साक्ष्यों के सहारे फोरेंसिक एक्सपर्ट विज्ञान के सिद्धांतों और नई तकनीकों का उपयोग करते हुए अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास करते हैं।
फोरेंसिक साइंस एक अप्लाइड साइंस है। अपराधियों का पता लगाने के लिए इस में वैज्ञानिक सिद्धांतों व तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इस कार्य में सहायक होते हैं अपराध स्थल से मिले साक्ष्य। इस के लिए एक्सपर्ट ब्लड, बॉडी फ्ल्यूड, हेयर, फिंगर प्रिंट, फुट प्रिंट और टिश्यू आदि की मदद लेते हैं।
चुनौतियों भरा है करियर
यह प्रोफेशन चुनौतियों भरा है। इसलिए इस करियर में आना है, तो ऊर्जा से भरपूर होना, अच्छी कम्युनिकेशन स्किल और विश्लेषणात्मक क्षमता होना जरूरी है। चुनौतियों से निपटना आना चाहिए। अच्छी तार्किक सोच रखने, हर पहलू पर बारीकी से विचार करने वाले और अलर्ट माइंड वाले इस करियर में आसानी से एडजस्ट हो सकते हैं। किसी केस को निपटाने के लिए कभी-कभी असफलता भी हाथ लगती है, तो ऐसे में धैर्य नहीं खोना चाहिए और उस केस को चुनौती के तौर पर लेना चाहिए। जांच-पड़ताल का क्षेत्र है, तो जाहिर सी बात है कि दोस्त कम होंगे और दुश्मन ज्यादा बन जाएंगे, तो इस बात से भी भयभीत होने की चुनौती भी इस करियर में है। हर स्थिति से निपटने की चुनौती स्वीकार करने वाला ही इसमें सफल होता है।
फोरेंसिक साइंस- ऐसे मिलेगा एडमिशन
फोरेंसिक साइंस में एंट्री के लिए साइंस बैकग्राउंड में बारहवीं दस जमा दो पास होना अनिवार्य है। जमा दो साइंस में करने के बाद ही आगे के रास्ते खुलते हैं। यदि साइंस संकाय से दस जमा दो की हुई है, तो फोरेंसिक साइंस में ग्रेजुएशन कर सकते हैं। ग्रेजुएशन के बाद फोरेंसिक साइंस और क्रिमिनोलॉजी में एक वर्षीय डिप्लोमा भी कर सकते हैं। फोरेंसिक साइंस में मास्टर डिग्री कोर्स करने के लिए स्नातक में फिजिक्स, केमिस्ट्री, जूलॉजी, बॉटनी, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, बी फार्मा,बीडीएस और एप्लाइड साइंस में किसी एक में 60 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य हैं। इसके अलावा फोरेंसिक स्पेशलिस्ट (जो मरने के बाद पोस्टमार्टम करते हैं) बनने के लिए एमबीबीएस की डिग्री जरूरी है। फोरेंसिक साइंस में एमडी भी कर सकते हैं। फोरेंसिक साइंस में स्पेशल कोर्स करके आप इस क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल कर सकते हैं। शैक्षणिक योग्यता बढ़ते ही आपके पद और पगार में बढ़ोतरी होती जाएगी।
प्रमुख शिक्षण संस्थान
* गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली
* इंस्टीच्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस एंड क्रिमिनोलॉजी, बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी
* डिपार्टमेंट ऑफ फोरेंसिक साइंस, पंजाब यूनिवर्सिटी
* दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली.
* डा. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा
* लोकनायक जय प्रकाश नारायण नेशनल इंस्टीच्यूट आफ क्रिमिनोलॉजी एंड फोरेंसिक साइंस, दिल्ली
प्रमुख कोर्स
* डिप्लोमा इन फोरेंसिक साइंस एंड क्रिमिनोलॉजी
* बीएससी इन फोरेंसिक साइंस
* पीजी डिप्लोमा इन क्रिमिनोलॉजी एंड पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन
* एमएससी इन फोरेंसिक साइंस
* एमएससी इन फोरेंसिक साइंस एंड क्रिमिनोलॉजी
* एमएससी इन साइबर फोरेंसिक एंड इन्फोर्मेशन सिक्योरिटी
* एमए इन क्रिमिनोलॉजी एंड जस्टिस
फोरेंसिक साइंस में स्पेशलाइज्ड कोर्स
इसमें निम्न क्षेत्रों में स्पेशलाइजेशन किया जा सकता है ः
* क्राइम सीन इनवेस्टिगेशन
* फोरेंसिक पैथोलॉजी एंड मेडिसिन
* फोरेंसिक एंथ्रोपोलॉजी
* फोरेंसिक डेंटिस्ट्री
* क्लीनिकल फोरेंसिक मेडिसिन
* फोरेंसिक एंटोमोलाजी
* फोरेंसिक सेरालॉजी
* फोरेंसिक केमिस्ट
* फोरेंसिक इंजीनियर
* टॉक्सिकोलॉजी
फोरेंसिक एक्सपर्ट के लिए संभावनाएं
फोरेंसिक एक्सपर्ट के लिए गवर्नमेंट और प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन में जॉब की अच्छी संभावनाएं हैं। यदि गवर्नमेंट जॉब की बात करें, तो फोरेंसिक साइंटिस्ट के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई), स्टेट पुलिस फोर्स की क्राइम सैल में, केंद्र व राज्य की फोरेंसिक लैब और प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी में जॉब के अच्छे अवसर हैं।
एंथ्रोपोलॉजी एमएससी कर बने फॉरेंसिक वैज्ञानिक
भले ही देश में रोजगार का संकट हो, लेकिन यदि आपने एंथ्रोपोलॉजी से एमएससी किया है तो आपके पास एक नहीं बल्कि नौकरी के कई जगह से ऑफर होंगे। वेतन भी 40 हजार से लेकर लाखों में मिलेगा। एडमिशन मेरिट के आधार पर होते हैं। यदि प्रवेश मिल गया तो भविष्य भी सुरक्षित समझें।
एंथ्रोपोलॉजी में एमएससी में किसी भी विषय से स्नातक किए विद्यार्थी दाखिला ले सकते हैं। प्रवेश मेरिट के आधार पर होता है। मई-जून में इसकी प्रक्रिया शुरू होती है। इसके अलावा बीएससी ऑनर्स भी कर सकते हैं। इसमें प्रवेश कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के जरिये होता है। इसके डिप्लोमा इन फॉरेंसिक साइंस एंड क्रिमोनोलॉजी भी होता है। इसमें 22 सीटें हैं। इन सभी कोर्स से पढ़े युवाओं के लिए नौकरी के कई क्षेत्रों में रास्ते खुलते हैं।
यहां हैं नौकरी की संभावनाएं
एंथ्रोपोलॉजी में एमएससी करने के बाद युवाओं को कई क्षेत्रों में नौकरी मिल जाती है। चिल्ड्रन ग्रोथ एंड डेवलपमेंट, कम्युनिटी मेडिसिन और पब्लिक हेल्थ के अलावा मेडिकल इंस्टीट्यूट, फॉरेंसिक मेडिसिन डिपार्टमेंट, जेनेटिक लैबोरेट्री, ट्राइबल वेलफेयर डिपार्टमेंट, आर्कोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, आईसीएमसीआर लैबोरेट्री, न्यूट्रीशियन इंस्टीट्यूट आदि जगहों पर नौकरी की संभावनाएं हैं।


